राष्ट्रीय विज्ञान दिवस-2026

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस
समारोह – 2026


राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र , इंदौर
परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार
28 फरवरी और 01 मार्च 2026

इस वर्ष के राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का विषय

विज्ञान में महिलाएँ: विकसित भारत की उत्प्रेरक

आरआरकेट में 28 फरवरी और 01 मार्च 2026 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह का आयोजन

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को डॉ. सी. वी. रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज की स्मृति में मनाया जाता है। डॉ. सी. वी. रमन को वर्ष 1930 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार और 1954 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। आरआरकेट ने 28 फरवरी और 1 मार्च 2026 को विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्रों, शिक्षकों, आरआरकेट स्टाफ के परिवार के सदस्यों और उनके अतिथियों तथा आम-जनता से आमंत्रित व्यक्तियों के लिए अपनी प्रयोगशालाएं खोलकर राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया। भारत सरकार ने इस वर्ष के राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का विषय "विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत की उत्प्रेरक" घोषित किया था।

शनिवार, 28 फरवरी, 2026 को इंदौर और आसपास के शहरों के कक्षा 11 के छात्रों तथा विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों को उच्च स्तरीय अनुसंधान सुविधाओं का अनुभव प्राप्त करने के लिए पूरे दिन के दौरे के लिए आमंत्रित किया गया था। इंदौर और आसपास के शहरों के 82 विद्यालयों के 1200 से अधिक छात्रों और शिक्षकों ने आरआरकेट का दौरा किया। कार्यक्रम की शुरुआत श्री विराज पी. भणगे, निदेशक, आरआरकेट के अभिभाषण से हुई, जिसमें उन्होंने रमन प्रभाव की मूलभूत बातें और लेसर के कार्य करने के सिद्धांत के बारे में बताया। प्रौद्योगिकी विकास और आधार वर्ग के निदेशक श्री जिष्णु द्विवेदी ने छात्रों को त्वरक की अवधारणाओं के बारे में समझाया। सरल भाषा में लेसर और त्वरक प्रौद्योगिकियों की स्पष्ट व्याख्या को छात्रों और शिक्षकों द्वारा बहुत सराहा गया। स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत छात्रों और शिक्षकों को स्वच्छता एवं सफाई के महत्व को दर्शाने वाली कुछ लघु फिल्में भी दिखाई गईं।

विशेष विद्यालयों से आमंत्रित श्रवण और वाक् बाधित छात्रों के लिए इंटरप्रेटर-टीचर्स के साथ समारोह में भाग लेने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। प्रोटॉन त्वरक वर्ग के सह-निदेशक डॉ .विनीत कुमार ने इंटरप्रेटर-टीचर्स की सहायता से दिव्यांग (विशेष रूप से सक्षम) छात्रों को लेसर और त्वरक की अवधारणाओं को बहुत ही सरल तरीके से समझाया। आरआरकेट के निदेशक ने आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्यों के साथ इंटरैक्टिव सत्र में 30 से अधिक विशेष छात्रों के साथ बातचीत की और इंटरप्रेटर शिक्षकों की सहायता से उनके प्रश्नों का उत्तर दिया। छात्रों ने इस इंटरैक्टिव सत्र में बड़े उत्साह के साथ भाग लिया और प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासा को शांत किया।

इसके बाद, आरआरकेट वालंटियर्स के मार्गदर्शन में सभी छात्र संगठित समूहों में प्रयोगशालाओं और आरआरकेट सम्मेलन केंद्र में प्रदर्शनी स्थलों पर गये। आरआरकेट की वैज्ञानिक और तकनीकी गतिविधियों को समझाने के लिए, त्वरक, लेसर, क्रायोजेनिक्स, सुपरकंडक्टिविटी, आरएफ और माइक्रोवेव, मैग्नेट की प्रौद्योगिकियों से संबंधित लगभग 40 प्रदर्शनियों के साथ-साथ अग्नि एवं संरक्षा पहलुओं का प्रदर्शन किया गया। साथ ही मूलभूत विज्ञान और इंजीनियरिंग में अवधारणाओं को समझाया गया।

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छायाचित्र :   [1]  [2]  [3]  [4]  [5]  [6]  [7] 

विस्तृत प्रदर्शनों ने जटिल वैज्ञानिक सिद्धांतों को आकर्षक दृश्य अनुभवों में सफलतापूर्वक परिवर्तित किया, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:

इंडस त्वरक कॉम्प्लेक्स : भारत के प्रमुख सिंक्रोट्रॉन विकिरण स्रोतों इंडस-1 और इंडस-2 पर मूवी शो और लाइव सीसीटीवी दृश्य।

अत्याधुनिक लेसर: औद्योगिक एनडी:वाईएजी लेसर कटिंग, लेसर मार्किंग, CO2 लेसर एयर ब्रेकडाउन और पाउडर बेड फ्यूजन (पीबीएफ) आधारित 3डी प्रिंटिंग, ऑप्टिकल ट्वीज़र्स और अग्नि-रक्षक (लंबी दूरी पर आग का पता लगाने के लिए एक स्मार्ट फाइबर-ऑप्टिक सेंसर प्रणाली) का लाइव प्रदर्शन।

क्रायोजेनिक्स और पदार्थ : तरल नाइट्रोजन के साथ प्रयोग, जहां छात्रों ने कृत्रिम बादल बनते हुए देखा और यह भी देखा कि कैसे पदार्थ अत्यंत न्यून तापमान पर अपने गुणों को तेजी से परिवर्तित कर लेते हैं।

प्रगत इंजीनियरिंग:चुंबकीय प्रेरण सिद्धांत का उपयोग करके फ्लोट करने वाली मैग्लेव ट्रेन का एक लाइव वर्किंग मॉडल, उच्च दबाव वाली वाटर जेट मशीन सहित प्रगत विनिर्माण प्रक्रियाएं जो 4,000 बार तक दाबित पानी का उपयोग करके ठोस सामग्री को काटने में सक्षम हैं।

विज्ञान की कुछ मूलभूत अवधारणाओं को समझाने के लिए, रमन प्रभाव, शिलिरेन इमेजिंग, कुल आंतरिक प्रतिबिंब, गति के नियम, गैस नियम, संवेग संरक्षण इत्यादि जैसे विशेष प्रयोग स्थापित किए गए थे। कुछ प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों को समझाने के लिए, फाइबर ब्रैग ग्रेटिंग आधारित मल्टी-पॉइंट तापमान सेंसर प्रणाली, सूक्ष्म मशीनिंग, इंडक्शन हीटिंग आदि का लाइव प्रदर्शन किया गया। एससीआरएफ कैविटी के विकास, स्वदेशी 10 MeV लीनियर एक्सीलरेटर, पतली फिल्म लेपित प्रकाशिकी, आरएफ और माइक्रोवेव संकेतों का पता लगाने पर वीडियो भी दिखाए गए।

छात्रों और शिक्षकों की समग्र प्रतिक्रिया बहुत अच्छी थी, सभी ने प्रदर्शनियां देखने में गहरी रुचि और उत्साह दिखाया तथा आरआरकेट अधिकारियों के साथ सक्रियता से चर्चा की। लेसर कटिंग, मैग्नेटिक लेविटेटेड ट्रेन, तरल नाइट्रोजन द्वारा कृत्रिम बादल निर्माण का प्रदर्शन और आधुनिक अग्निशामक उपकरणों जैसे प्रति मिनट 2 लाख लीटर फोम निकालने वाला हाई एक्सपेंशन फोम जनरेटर और अग्निशामक के विभिन्न पैटर्न के लाइव प्रदर्शन ने युवाओं को प्रभावित किया तथा छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों और मेहमानों ने इसकी प्रशंसा की।

विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को और प्रोत्साहित करने के लिए, “प्रश्न मंच” (वैज्ञानिक प्रश्नोत्तरी) और "वैज्ञानिक से पूछिए" कार्यक्रम रखे गए थे, जिससे छात्रों को वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ मूलभूत भौतिकी से लेकर प्रगत इंजीनियरिंग तक के विषयों पर बेझिझक चर्चा करने के लिए एक खुला मंच मिला। इस कार्यक्रम के माध्यम से संबंधित शिक्षक विज्ञान की विशेष अवधारणाओं को पढ़ाने में आने वाली समस्याओं पर चर्चा करने के लिए भी प्रोत्साहित हुए। जिज्ञासु विद्यार्थियों को सहभागिता पुरस्कार भी दिए गए।

सभी छात्रों और साथ आए शिक्षकों के लिए सुबह के समय जलपान और दोपहर में भोजन की व्यवस्था की गई। इस दौरे को यादगार बनाने के लिए, तकनीकी विवरणिका व एनएसडी-2026 स्मारिका कैप सभी प्रतिभागी छात्रों और शिक्षकों को वितरित की गई। प्रदर्शनी के दौरों और "प्रश्न पूछिए" कार्यक्रम के दौरान छात्रों द्वारा पूछे गए प्रश्नों की संख्या से साबित हुआ कि छात्रों की समग्र प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक थी। वे पऊवि और विशेष रूप से आरआरकेट द्वारा की जा रही वैज्ञानिक गतिविधियों की प्रशंसा के शब्दों के साथ घर गए। सभी ने आरआरकेट के सुरम्य परिसर में स्वच्छता, हरियाली और झीलों का आनंद लिया और उनकी सराहना की।

आरआरकेट स्टाफ के परिवार के सदस्यों और अतिथियों, शिक्षकों के साथ महाविद्यालय के छात्रों तथा आमंत्रित व्यक्तियों को, रविवार, 01 मार्च, 2026 को, आरआरकेट की प्रयोगशालाओं का दौरा करने का अवसर मिला।

कॉलेज के छात्रों की उन्नत शैक्षणिक पृष्ठभूमि को दृष्टिगत रखते हुए, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस. के. राय ने "सिंक्रोट्रॉन विकिरण और उसके अनुप्रयोग (Demystifying Synchrotron Radiation and its applications)” विषय पर एक बहुत ही रोचक व्याख्यान दिया। इस व्याख्यान में विस्तारपूर्वक बताया गया कि सिंक्रोट्रॉन विकिरण का उपयोग विभिन्न विषयों में किस प्रकार किया जाता है; इनमें इंजीनियरिंग अनुप्रयोग, प्रोटीन क्रिस्टलोग्राफी, एक्स-रे इमेजिंग, सॉफ्ट एक्स-रे अवशोषण स्पेक्ट्रोस्कोपी, लघु एवं विस्तृत कोण एक्स-रे प्रकीर्णन, फोटोइलेक्ट्रॉन स्पेक्ट्रोस्कोपी, नैनोमैटेरियल्स, एक्स-रे फ्लोरेसेंस और विस्तृत एक्स-रे अवशोषण सूक्ष्म संरचना स्पेक्ट्रोस्कोपी शामिल हैं।

21 महाविद्यालयों के लगभग 470 छात्रों और शिक्षकों सहित 2800 से अधिक व्यक्तियों ने प्रयोगशालाओं का दौरा किया और केंद्र में किए जा रहे महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के बारे में जानने का अवसर मिलने पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।

आरआरकेट का उद्देश्य, इन दो दिनों में अपनी प्रगत प्रयोगशालाओं को युवाओं के लिए खोलकर, सैद्धांतिक रूप से कक्षा में शिक्षण और वास्तविक दुनिया के उन्नत अनुसंधान के बीच अंतर को कम करना था।

इस पूरे मेगा कार्यक्रम का सुचारू प्रबंधन एनएसडी-2026 की आयोजन समिति द्वारा आरआरकेट के निदेशक श्री विराज पी. भणगे के मार्गदर्शन में किया गया; जिसमें डॉ. अल्पना राजन (सह-निदेशक, प्रौद्योगिकी विकास और आधार वर्ग) अध्यक्ष और डॉ. पी. गणेश (प्रमुख, धातुकर्म अभिलक्षणन एवं रसायन प्रौद्योगिकी अनुभाग, डीएमटीडी) इस कार्यक्रम के संयोजक शामिल थे। समिति ने वालंटियर्स, प्रदर्शकों, प्रशासनिक कर्मचारियों, आरआरकेट सुरक्षा और केऔसुब कर्मचारियों की एक बड़ी टीम की सहायता और उत्साहपूर्ण सहयोग से कार्यक्रम का व्यापक प्रबंध किया। प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों ने इस कार्यक्रम को अपने-अपने समाचार-पत्रों में स्थान दिया।


आयोजक: राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र , इंदौर
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